धर्मवीर भारतीजी का यह लघु उपन्यास एक बैठक में पूरा पढ डाला, आदयोपान्त। लघु उपन्यास मुझे इसलिए बेहद पसंद है।
ये 7 दिन चलने वाली भागवत कथा के समान है बस विषय
प्रेम का है। कथा सुनाने वाले है माणिक मुल्ला। ऐसा व्यक्ति जिसने प्रेम के क्षेत्र
में उम्र के हिसाब से कुछ ज्यादा ही अनुभव ले लिए है। कहानियां उनके जीवन से संबंधित
है पर उन कहानियों में वो कही भी निर्णायक भूमिका में नही रहे है। बस वे उन कहानियों
में सिर्फ अटके हुए पात्र है। एक दर्शक मात्र।
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