Thursday, 28 September 2023

सेवासदन

उपन्‍यास खतरनाक आदर्शवादी है। स्‍वामी गजानंद का चरित्र सत्‍य से पलायन है, असुन्‍दर को ढंकने का उपक्रम है। यहां प्रेमचन्‍द की कमजोरी नजर आती है। शायद सदियों पुराने पतिव्रत आदर्श की अवहेलना वे न कर पाए। ऐसे पात्रों के ग्‍लोरिफिकेशन से बचा जा सकता था।

       सबसे यथार्थ पात्र कृष्‍णचन्‍द्र का है। परिस्थितियों ने उसे बनाया व बिगाढा।

       उपन्‍यास द्विवेदीयुगीन उपदेशात्‍मकता से भरपुर है। संवाद कही कही बोझिल से जान पडते है। गठन में उपन्‍यास कुछ स्‍थूल सा हो गया है।

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